आखिर क्यों जर्मनी को इंजिनियरिंग हब माना जाता है? क्यों जर्मनी के विश्वविद्यालयों में संस्कृत पढ़ाया जाना शुरू हुआ है?
नमस्कार साथियों, हम सनातन यात्रा पेज के माध्यम से आपको सभी प्राचीन धर्मों, वेदों, पुराणों, व सनातन धर्म से जुड़े एतिहास व रोचक तथ्यों के बारे में अवगत करवाएँगे। आज का हमारा टॉपिक है संस्कृत भाषा । संस्कृत भाषा का इतिहास मानव की उत्पत्ति से भी पुराना है। संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन बार विशालकाय भाषा मानी जाती है। मैं हमारे पुराणों, वेदों की रचना हुई है। व यह सबसे ज्ञानवर्धक भाषा में से एक मानी जाती है। यहां तक कि हिंदी की भी उत्पत्ति संस्कृत भाषा से हुई है । हिंदी की लिपि मानी जाने वाली देवनागरी की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है।
आइए हम सब से पहले संस्कृत भाषा के इतिहास के बारे में जान लेते हैं । उत्पत्ति कितने वर्ष पूर्व हुई इस बात का सटीक अनुमान लगाना तो मुश्किल है परंतु संस्कृत का पाणिनि को माना जाता है। विश्व का सबसे प्राचीन लिखित ग्रंथ ऋग्वेद को माना जाता है और यह संस्कृत में लिखित है। हिंदी, कश्मीरी, नेपाली, बांग्ला, गुजराती हिंदी भाषा की उत्पत्ति भी संस्कृत से ही हुई है। प्राचीन काल में वैदिक भाषा केवल संस्कृत ही थी। एवं इसके साथ साथ बोलचाल के लिए कुछ कुछ जगह अन्य भाषाओं का भी प्रचलन था । भाषा का समय समय पर रूप परिवर्तित होता रहा व यही आगे चलकर हिंदी में परिवर्तित हुई। भगवान बुद्ध का बुद्ध चरित्र भी संस्कृत भाषा में ही लिखित है। भगवान बुद्ध के जन्म के बाद ही पाली भाषा प्रचलन में आई। पाली भाषा सम्राट अशोक के शासन में अधिक प्रचलित हुई । अर्थात हिंदी का मूल स्वरूप या जननी संस्कृत भाषा ही है । विज्ञान की भाषा है। विश्व का सबसे बड़ा ग्रंथ श्रीमद भगवत गीता जो श्री कृष्ण द्वारा कही गई है वह भी संस्कृत में रचित है। जो लोग इसकी उत्पत्ति में महानता पर सवाल उठाते हैं उनके लिए यह जान लेना आवश्यक है कि यूरोप व पश्चिम एशिया में प्रचलित भाषा अंग्रेजी, स्पेनिश, फ्रेंच में भी संस्कृत भाषा के शब्दों का सरोकार देखने को मिल जाता है। जिस समय यूरोप व मध्य एशिया में लोग आदिमानव अवस्था में ही थे उस समय भारतीय सभ्यता के चरम पर थी। लोग इशारे की भाषा से बात करते थे वहीं दूसरी ओर भारतीय भाषाओं का विकास उन्नति के शीर्ष पर था।
संस्कृत का मतलब है संस्कार करके बनाई गई भाषा। आदित्य ने भी संस्कृत भाषा को अपनाया था। संस्कृत जितनी प्राचीन है इसका इतिहास उतना ही गहरा है। प्राचीन वेदों जैसे ऋग्वेद, सामवेद, अर्थवेद, यजुर्वेद आदि संस्कृत भाषा में लिखित है। आर्यों कोई संस्कृत भाषा का जनक माना जाता है। सबसे पहली संपूर्ण भाषा होने का दर्जा भी संस्कृत को ही प्राप्त है। संस्कृत ना होती तो होती तो आज विश्व की लगभग सभी महत्वपूर्ण भाषाएं हिंदी, अंग्रेजी आदि की उत्पत्ति ना हुई होती। इसका जन्म भारतीय उपमहाद्वीप में हुआ था। इसका विकास दो भागों में हुआ है। वैदिक संस्कृत जिसमें समस्त वेद व उपनिषद आते हैं। एवं दूसरा पाणिनि द्वारा रचित संस्कृत जिसे आधुनिक संस्कृत माना जाता है। वर्तमान में पढ़ी लिखी जाने वाली संस्कृत पाणिनि द्वारा रचित व्याकरण पर ही आधारित है। वैज्ञानिकों व विद्वानों द्वारा किए गए शोध के अनुसार संस्कृत भाषा का प्रभाव प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 97% भाषाओं पर है। भारतीय संस्कृति में किए जाने वाले समस्त यज्ञ व अनुष्ठान संस्कृत भाषा में ही किए जाते हैं। अब कुछ तथ्य जान लेते हैं जो आधुनिक वैज्ञानिकों के विद्वानों द्वारा दिए गए हैं।
1. संस्कृत भाषा के एक शब्द के 100 से अधिक पर्यायवाची है जो कि किसी भी भाषा में सर्वाधिक है।
2. शोध में पाया गया है कि संस्कृत भाषा का अध्ययन करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।
3. नासा के वैज्ञानिकों ने शोध में पाया है की संस्कृत का प्रयोग करके कंप्यूटर प्रोग्रामिंग सिस्टम को सरल बनाया जा सकता है तथा इसके प्रयोग से यही सिस्टम बनाया गया तो उसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि होने की संभावना खत्म हो जाती है।
4. अमेरिका में विश्वविद्यालय द्वारा की गई रिसर्च से पता चलता है कि संस्कृत में बात करने से मानव शरीर की तंत्रिका सक्रिय रहती है जिससे मधुमेह है व हृदय रोग होने की संभावना कम हो जाती है।
5. संस्कृति एकमात्र ऐसी भाषा है जो संपूर्ण विकसित भाषा है। इसकी व्याकरण संपूर्ण प्रभावशाली व त्रुटि रहित है। जबकि इसमें सबसे अधिक शब्दकोश है पुलिस डॉग संस्कृत में लगभग 102 अरब 78 करोड़ 50 लाख से अधिक शब्दों का समावेश है वह भी बिना किसी त्रुटि के।
6. भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य सत्यमेव जयते भी संस्कृत में ही लिखित है जिसका अर्थ है सत्य की विजय हो।
7. जर्मनी जिसे पूरी दुनिया इंजीनियरिंग अब मानती है वहां के 14 विश्वविद्यालयों में संस्कृत भाषा बोली में सिखाई जाती है।
8. संस्कृत भाषा के वाक्य उल्टे लिखे जाने पर भी अपना अर्थ नहीं बदलते।
9. अमेरिका सुपर कंप्यूटर की अगली पीढ़ी को संस्कृत भाषा के प्रोग्राम सिस्टम की सहायता से बना रहा है जिससे उनकी कार्यप्रणाली व गणना शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी ।
परंतु आज भी जहां यूरोप के लोग भारतीय संस्कृति अपना रहे हैं वहीं भारतीय युवा ही पाश्चात्य सभ्यता की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। हालांकि यह बुरा नहीं है परिवर्तन संसार का नियम है । परंतु स्वयं की छवि भूल कर दूसरों की परछाई बनना गलत बात है। आज इस लेख के माध्यम से सनातनी यात्रा समस्त पाठकों से यही कहना चाहती है कि संस्कृत में भारतीय सभ्यता महान है वह इसका इतिहास मानव के जन्म से पूर्व का है इसलिए जो तथ्य वे इतिहास है उन्हें नजरअंदाज ना करें वह सभ्यता का सम्मान करें। आगे भी हम हिंदू हैं सनातन धर्म से जुड़े विषयों पर रोचक व ज्ञानवर्धक लेख लाते रहेंगे।
जय सनातन धर्म।।

जय सनातन
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